जानिए रक्षाबंधन की शुरुआत कैसे हुई

रक्षाबंधन का त्यौहार भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक होता है जिसमें बहन ने भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं और बदले में भाई जिंदगी भर उसकी रक्षा करने का वचन देता है|हिंदुओं में इस त्यौहार को बहुत ही पवित्र माना जाता है|इस त्यौहार का इतिहास बहुत पुराना है और इससे जुड़ी अनेक प्रसिद्ध कहानियां है जिनमें से एक है रानी कर्णावती की कहानी|जब मेवाड़ की रानी कर्णावती के पति की मृत्यु हुई तब उस वक़्त के शासक बहादुर शाह ने उनके राज्य पर हमला कर दिया|स्थिति को गंभीर होते देख रानी कर्णावती ने मुग़ल शासक हुमायूं से मदद मांगी और साथ में राखी भी भेजी|हालांकि उस वक्त हुमायूं किसी और युद्ध में व्यस्त था लेकिन जब उसे रानी कर्णावती का संदेश मिला तो राखी की लाज रखते हुए वह मेवाड़ की तरफ निकल पड़ा लेकिन शायद होनी को कुछ और ही मंजूर था|हुमायूं को मेवाड़ पहुंचने में देरी हो गई और नतीजा यह हुआ कि रानी कर्णावती को बाकी महिलाओं के साथ जोहर करना पड़ा|कहा जाता है कि हुमायूं को यह सब सुनकर बहुत दुख हुआ और इसका बदला लेने के लिए उसने बहादुर शाह जफर से जंग लड़ी और जीतने के बाद रानी कर्णावती के पुत्र को वहां का शासक बनाया तब से लेकर आज तक इसे हिंदुओं का एक पवित्र त्यौहार माना जाता है

इस साल यानी 2018 का रक्षाबंधन 26 अगस्त को मनाया जाएगा|पंडितों के अनुसार सुबह के 7: 30 बजे से लेकर शाम के 4: 15 बजे तक राखी बांधने का शुभ मुहूर्त है |

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